Wednesday, 5 July 2017

GST : Goods and Service Tax

भारत मे GST यानी Goods And Service Tax लागू हो चुका है और यह हुआ भी है बड़ी मसक्कत के साथ । हमेशा से ही इस मुद्दे पर बात करने की ठानी जाती थी और कोई न कोई व्यवधान बीच मे उपस्थित हो ही जाता था । अन्ततः इसकी शुरुआत हो चुकी है और इस फैसले से कुछ लोगों को खुशी भी है और कुछ लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं जो इसके पक्ष मे नहीं हैं ।

भारत सरकार के इस फैसले की सराहना करना चाहता हूं कि GST लागू होने के बाद उन लोगों को भी कानून के दायरे मे रहकर टैक्स जरूर देना पड़ेगा जो इसकी चोरी किया करते थे ।

पेमेंट करते वक्त इन बातों का जरूर ध्यान रखें -

कंपनी का नाम- बिल पर कंपनी का नाम होना चाहिए.

कंपनी का पता और फोन नंबर- बिल पर कंपनी का पता और कोई भी एक कॉन्‍टेक्‍ट नंबर होना जरूरी है.

जीएसटिन नंबर – इसका अर्थ है गुड्स एंड सर्विस टैक्‍स इंफोर्मेशन नंबर. यह बिल में होना अनिवार्य है.

पैन नंबर – पैन कार्ड का नंबर होना चाहिए. पैन नंबर होने का अर्थ है कि कंपनी की आयकर विभाग में डिटेल्‍स दर्ज हैं. (हालांकि जीएसटिन नंबर है तो पैन नंबर की खास जरूरत नहीं है)

CIN नंबर- यह कॉरपोरेट आईडेंटिफिकेशन नंबर के रूप में बिल पर दर्ज होता है.

टिन नंबर- यह किसी भी कंपनी का टैक्‍स इंर्फोमेशन नंबर होता है. जिसका अर्थ है कि कंपनी टैक्‍स भर रही है. हालांकि अगर जीएसटिन नंबर है तो टिन नंबर की कोई जरूरत नहीं है.

एचएसएन कोड- यह कोड भी बिल पर दर्ज होना चाहिए.

स्‍टेट कोड- 29 राज्‍यों के अलग-अलग कोड हैं. ऐसे में सेवा प्रदाता को अपने बिल में स्‍टेट कोड दर्ज होना चाहिए.

भुगतान करें तो याद रखें, वस्‍तु या सेवा के भुगतान में हों सिर्फ ये दो टैक्स

अगर आप कहीं भी बिल भर रहे हैं तो याद रखें कि वस्‍तु और सेवा पर सिर्फ GST ही देना होगा. यह GST भी बिल पर दो हिस्‍सों में दर्ज होना चाहिए. किसी भी वस्‍तु या सेवा पर लगने वाले कर को बिल में इन्‍हीं दो भागों में बांटा जाएगा. जैसे जीएसटी की दरें 5, 12, 18 और 28 फीसदी हैं. ऐसे में इन दोनों में 2.5-2.5, फीसदी, 6-6 फीसदी, 9-9 फीसदी या 14-14 फीसदी ही दर्ज होगा.

सीजीएसटी (CGST)- यह जीएसटी का वह भाग है जो केंद्र सरकार को जाता है.

एसजीएससी (SGST)– यह जीएसटी का वह आधा हिस्‍सा है जो राज्‍य सरकार के खाते में जाता है.