काले धन पर रोक लगाने के लिए भारत सरकार ने विमुद्रीकरण ( Demonetization ) का रास्ता अपनाया जिसके तहत भारत में 1000₹ और 500₹ की नोट पर पूर्णतया पाबंदी लगा दी गयी । इस तरह से अचानक लिए गये इस साहसिक फैसले पर मै मोदी सरकार का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ लेकिन बात तो उस जगह पर बिगड़ जाती है जब 17 दिसम्बर 2016 को इस बात का ऐलान किया गया कि जितने भी राजनीतिक पार्टी से सम्बन्धित लोग हैं उनसे किसी भी प्रकार की कोई पूछताछ नहीं की जाएगी ।
मेरा मानना है कि कालाधन रखने वाला कोई आम आदमी तो है नहीं जो घण्टों कतारों मे खड़ा रहकर 2000 रू निकालकर ला रहा है और ऊपर से जो राजनीतिज्ञ हैं उनसे कोई पूछताछ नहीं होगी । ये किस तरह से काले धन पर रोक लगाने का काम कर रही है मोदी सरकार ? मेरी समझ मे तो बिल्कुल नहीं आ रहा है ।
" लोग यहाँ मर रहे हैं कतारों में
मोदी खोए हैं किन विचारों में "
~ फिलहाल फैसला तो साहसिक था लेकिन पता नहीं था कि रंग बदलने में इतनी जल्दी हो जाएगी ~
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