सागर से भी गहरी होती है ये मोहब्बत इसकी गहराई मे जाकर बाहर नहीं निकल सकते डूबकर रह जाओगे पर निकलने की गुंजाइश बिल्कुल नहीं । जिस तरह से समंदर के भीतर अंधेरा होता है मोहब्बत भी उसी गहराई में पैदा हुए अंधेरे की तरह है अगर इसमें पड़ गये तो आपकी जिंदगी भी अंधेरे मे चली जाएगी ।
" मोहब्बत में यारों सबक एक रोज सीखोगे
नफरत करोगे जब खिलता गुलाब देखोगे "
~ अनुज सीतापुरी
मैने भी मोहब्बत की थी पर अंजाम-ए-इश्क से मुख़ातिब न थे बस जहाँ इसने लाकर छोड़ा ... मै खुद ही समझ गया....
कि...
" दिल्लगी के खेल में न जाने कैसी चालें हैं
कोई हारकर जीता तो कोई जीतकर हारा "
~ अनुज सीतापुरी
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